महावीराष्टक स्तोत्र (Mahavirashtak Stotra)-यदीये चैतन्ये


महावीराष्टक स्तोत्र (Mahavirashtak Stotra) जैन धर्म का एक महत्वपूर्ण स्तोत्र है। यह 8 श्लोक में लिखा गया है, और इसे अक्सर भगवान

महावीर

की पूजा और स्तुति के लिए इसका पाठ किया जाता है। यह स्तोत्र कवि भागचंद द्वारा लिखा गया है।

महावीराष्टक स्तोत्र लिरिक्स (Mahavirashtak Stotra Lyrics)

यदीये चैतन्ये मुकुर इव भावाश्चिदचिताः

समं भान्ति ध्रौव्य व्यय-जनि-लसन्तोऽन्तरहिताः।

जगत्साक्षी मार्ग-प्रकटन परो भानुरिव यो

महावीर-स्वामी नयन-पथ-गामी भवतु मे॥(१ )

अताम्रं यच्चक्षुः कमल-युगलं स्पन्द-रहितं

जनान्कोपापायं प्रकटयति वाभ्यन्तरमपि।

स्फुटं मूर्तिर्यस्य प्रशमितमयी वातिविमला

महावीर-स्वामी नयन-पथ-गामी भवतु मे॥(२)

नमन्नाकेंद्राली-मुकुट-मणि-भा जाल जटिलं

लसत्पादाम्भोज-द्वयमिह यदीयं तनुभृताम्‌।

भवज्ज्वाला-शान्त्यै प्रभवति जलं वा स्मृतमपि

महावीर स्वामी नयन-पथ-गामी भवतु मे॥(३)

यदर्चा-भावेन प्रमुदित-मना दर्दुर इह

क्षणादासीत्स्वर्गी गुण-गण-समृद्धः सुख-निधिः।

लभन्ते सद्भक्ताः शिव-सुख-समाजं किमुतदा

महावीर-स्वामी नयन-पथ-गामी भवतु मे॥(४)

कनत्स्वर्णाभासोऽप्यपगत-तनुर्ज्ञान-निवहो

विचित्रात्माप्येको नृपति-वर-सिद्धार्थ-तनयः।

अजन्मापि श्रीमान्‌ विगत-भव-रागोद्भुत-गतिः

महावीर-स्वामी नयन-पथ-गामी भवतु मे॥(५)

यदीया वाग्गंगा विविध-नय-कल्लोल-विमला

बृहज्ज्ञानांभोभिर्जगति जनतां या स्नपयति।

इदानीमप्येषा बुध-जन-मरालैः परिचिता

महावीर-स्वामी नयन-पथ-गामी भवतु मे॥(६)

अनिर्वारोद्रेकस्त्रिभुवन-जयी काम-सुभटः

कुमारावस्थायामपि निज-बलाद्येन विजितः

स्फुरन्नित्यानन्द-प्रशम-पद-राज्याय स जिनः

महावीर-स्वामी नयन-पथ-गामी भवतु मे॥(७)

महामोहातंक-प्रशमन-परा-कस्मिन्भिषग्

निरापेक्षो बंधु र्विदित-महिमा मंगलकरः।

शरण्यः साधूनां भव-भयभृतामुत्तमगुणो

महावीर-स्वामी नयन-पथ-गामी भवतु मे॥(८)

महावीराष्टकं स्तोत्रं भक्त्या ‘भागेन्दु’ ना कृतम्।

यः पठे च्छ्रणुयाच्चापि स याति परमां गतिम्‌॥(९)

महावीराष्टक स्तोत्र लिरिक्स अंग्रेजी में (Mahavirashtak Stotra Lyrics In English)

yadiiye chaitanye mukur iv bhaavaashchidachitaaah

samam bhaanti dhrowvy vyay-jani-lasantoऽntarahitaaah.

jagatsaakshii maarg-prakaṭan paro bhaanuriv yo

mahaaviir-svaamii nayan-path-gaamii bhavatu me॥(१ )

ataamram yachchakshuah kamal-yugalam spand-rahitam

janaankopaapaayam prakaṭayati vaabhyantaramapi.

sphuṭam muurtiryasy prashamitamayii vaativimalaa

mahaaviir-svaamii nayan-path-gaamii bhavatu me॥(२)

namannaakendraalii-mukuṭ-maṇi-bhaa jaal jaṭilam

lasatpaadaambhoj-dvayamih yadiiyam tanubhṛtaam‌.

bhavajjvaalaa-shaantyai prabhavati jalam vaa smṛtamapi

mahaaviir svaamii nayan-path-gaamii bhavatu me॥(३)

yadarchaa-bhaaven pramudit-manaa dardur ih

kshaṇaadaasiitsvargii guṇ-gaṇ-samṛddhah sukh-nidhiah.

labhante sadbhaktaaah shiv-sukh-samaajam kimutadaa

mahaaviir-svaamii nayan-path-gaamii bhavatu me॥(४)

kanatsvarṇaabhaasoऽpyapagat-tanurjñaan-nivaho

vichitraatmaapyeko nṛpati-var-siddhaarth-tanayah.

ajanmaapi shriimaan‌ vigat-bhav-raagodbhut-gatiah

mahaaviir-svaamii nayan-path-gaamii bhavatu me॥(५)

yadiiyaa vaaggangaa vividh-nay-kallol-vimalaa

bṛhajjñaanaanbhobhirjagati janataan yaa snapayati.

idaaniimapyeshaa budh-jan-maraalaiah parichitaa

mahaaviir-svaamii nayan-path-gaamii bhavatu me॥(६)

anirvaarodrekastribhuvan-jayii kaam-subhaṭah

kumaaraavasthaayaamapi nij-balaadyen vijitah

sphurannityaanand-prasham-pad-raajyaay s jinah

mahaaviir-svaamii nayan-path-gaamii bhavatu me॥(७)

mahaamohaatank-prashaman-paraa-kasminbhishag

niraapeksho bandhu rvidit-mahimaa mangalakarah.

sharaṇyah saadhuunaan bhav-bhayabhṛtaamuttamaguṇo

mahaaviir-svaamii nayan-path-gaamii bhavatu me॥(८)

mahaaviiraashṭakam stotram bhaktyaa ‘bhaagendu’ naa kṛtam.

yah paṭhe chchhraṇuyaachchaapi s yaati paramaan gatim‌॥(९)

महावीराष्टक स्तोत्र वीडियो (Mahavirashtak Stotra Video)

महावीराष्टक स्तोत्र विधि (Mahavirashtak Stotra Vidhi)

  • महावीराष्टक स्तोत्र करने से पहले, अपने शरीर और मन को शुद्ध करना आवश्यक है। इसके लिए, आप स्नान कर सकते हैं, धूप-दीप जलाकर पूजा कर सकते हैं, या ध्यान कर सकते हैं।
  • महावीराष्टक स्तोत्र किसी भी स्थान पर किया जा सकता है, लेकिन यदि आप इसे अधिक प्रभावी बनाना चाहते हैं, तो किसी शांत और पवित्र स्थान पर इसे करना बेहतर होगा।
  • महावीराष्टक स्तोत्र करते समय, आप किसी भी आरामदायक मुद्रा में बैठ सकते हैं। यदि आप अधिक ध्यान केंद्रित करना चाहते हैं, तो आप पद्मासन या वज्रासन जैसी मुद्रा में बैठ सकते हैं।
  • महावीराष्टक स्तोत्र करते समय, अपने मन को भगवान महावीर पर केंद्रित करें। आप भगवान महावीर के चित्र या मूर्ति के सामने बैठ सकते हैं।
  • महावीराष्टक स्तोत्र का पाठ करते समय, धीरे-धीरे और स्पष्ट रूप से उच्चारित करें। आप स्तोत्र का पाठ स्वयं कर सकते हैं, या किसी अन्य व्यक्ति को इसे सुन सकते हैं।
  • महावीराष्टक स्तोत्र का पाठ करने के बाद, भगवान महावीर से अपने लिए और दूसरों के लिए आशीर्वाद मांगें।

महावीराष्टक स्तोत्र लाभ (Mahavirashtak Stotra Benefit)

  • महावीराष्टक स्तोत्र में भगवान महावीर की महिमा और गुणों की प्रशंसा की गई है। इस स्तोत्र का पाठ करने से मन में ज्ञान और प्रकाश का संचार होता है।
  • महावीराष्टक स्तोत्र में भगवान महावीर को मोक्ष का मार्गदर्शक बताया गया है। इस स्तोत्र का पाठ करने से मोक्ष प्राप्ति की संभावना बढ़ती है।
  • महावीराष्टक स्तोत्र में भगवान महावीर को भक्तों के रक्षक बताया गया है। इस स्तोत्र का पाठ करने से बुराई से रक्षा होती है।
  • महावीराष्टक स्तोत्र में भगवान महावीर को सद्मार्ग पर चलने का मार्गदर्शक बताया गया है। इस स्तोत्र का पाठ करने से सद्मार्ग पर चलने में सहायता मिलती है।

महावीराष्टक स्तोत्र PDF

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महावीराष्टक स्तोत्र FAQ

महावीराष्टक स्तोत्र किसने लिखा है?

महावीराष्टक स्तोत्र (Mahavirashtak Stotra) को कवि भागचंद द्वारा लिखा गया है।

महावीराष्टक स्तोत्र में कितने श्लोक हैं?

महावीराष्टक स्तोत्र (Mahavirashtak Stotra) में 8 श्लोक है।

महावीराष्टक स्तोत्र का पाठ करने के लाभ क्या हैं?

महावीराष्टक स्तोत्र (Mahavirashtak Stotra) का पाठ करने के कई लाभ हैं। यह स्तोत्र भगवान महावीर की कृपा प्राप्त करने और अपने जीवन में ज्ञान, प्रकाश और मोक्ष प्राप्त करने में मदद कर सकता है।

महावीर भगवान कौन थे?

महावीर भगवान जैन धर्म के तीर्थंकरों में से एक थे। वे जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर थे और उन्हें वीरेश्वर, वीर, वरिष्ठ, वितराग, अरहंत, और जीनेन्द्र भी कहा जाता है।

महावीर भगवान का जन्म कब हुआ था?

महावीर भगवान का जन्म विशाली (वर्तमान वैशाली, बिहार, भारत) में हुआ था, और ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन आया था। इसे महावीर जयंती के रूप में मनाया जाता है।



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