त्रिभुवन पति की देख उदारता लिरिक्स (Tribhuvan Pati Ki Dekh Udarta Lyrics)

त्रिभुवन पति की देख उदारता लिरिक्स (Tribhuvan Pati Ki Dekh Udarta Lyrics) भगवान कृष्ण को समर्पित भक्ति गीत है। इस गीत में भगवान श्री कृष्ण अपने मित्र सुदामा के प्रेम में सुदामा द्वारा भेंट में लाये हुए चावल को खाकर तीनो लोक उनके नाम करने जा रहे है और फिर उनकी पत्नी माता रुक्मणि द्वारा दो मुट्ठी चावल खाने के बाद उन्हें रोक दिया जाता है।

यह गीत सुनने व देखने में अत्यंत मधुर लगती है, इस गीत में भगवान श्री कृष्ण की दयालुता और मित्रता प्रेम देखकर तीनो लोको के सभी देवी-देवता आश्चर्यचकित हो जाते है। इसका चित्रण रामानंद सागर जी बहुत ही सुन्दर तरीके से किया है, यह गीत रामानंद सागर जी द्वारा कृत श्री कृष्ण धाराविक से लिया गया है।

त्रिभुवन पति की देख उदारता लिरिक्स के बारे में (About Tribhuvan Pati Ki Dekh Udarta Lyrics)

गीत के बोल त्रिभुवन पति की देख उदारता, तीनो भवन थर्राने लगे है
निर्माता रामानंद सागर, सुभाष सागर, प्रेण सागर
निर्देशक रामानंद सागर , आनंद सागर, मोती सागर
संगीत रवींद्र जैन
गीतकार रवींद्र जैन

त्रिभुवन पति की देख उदारता लिरिक्स (Tribhuvan Pati Ki Dekh Udarta Lyrics)

त्रिभुवन पति की देख उदारता, तीनो भवन थर्राने लगे है

हाथ में चावल लेते ही, सब में दर भयो जात|

जाने अब किस लोक की सम्पति होये समाप्त ||

सब में दर भयो जात|

हर दाने का मोल अगर देने लगे भगवान |

रह जायेगा सृस्टि में बस एक ही धनवान ||

बस एक ही धनवान ||

प्रेम के भूंखे, प्रेम के तंदुल, प्रेम के भाव से खाने लगे है|

प्रेम के भूंखे, प्रेम के तंदुल, प्रेम के भाव से खाने लगे है|

तंदुल के दानो में, दीन का दिनया दररद्र चबाने लगे है|

तंदुल के दानो में, दीन का दिनया दररद्र चबाने लगे है|

एक एक मुठ्ठी में एक एक लोक,

एक एक मुठ्ठी में एक एक लोक, सुदामा के भाग्य में जाने लगे है||

एक एक मुठ्ठी में एक एक लोक, सुदामा के भाग्य में जाने लगे है

त्रिभुवन पति की देख उदारता, तीनो भवन थर्राने लगे है|

त्रिभुवन पति की देख उदारता, तीनो भवन थर्राने लगे है

पहली मुट्ठी देते ही प्रभु ने स्वर्ग सुदामा के नाम किया है

दूसरी मुठ्ठी में पृथ्वी लोक का वैभव विप्र को सौप दिया है||

तीसरी मुठ्ठी में देने लगे है,

तीसरी मुठ्ठी में देने लगे है जो वैकुण्ठ तो लक्ष्मी ने रोक लिया है

तीसरी मुठ्ठी में देने लगे है जो वैकुण्ठ तो लक्ष्मी ने रोक लिया है ||

अपना निवास भी दान में दे रहा है|

कैसा दानी ये मेरा पिया है|

अपना निवास भी दान में दे रहा है|

कैसा दानी ये मेरा पिया है|

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त्रिभुवन पति की देख उदारता लिरिक्स वीडियो (Tribhuvan Pati Ki Dekh Udarta Lyrics Video)



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