जय जय जय सरस्वती माता
विद्या ज्ञान प्रदायिनी, भक्तन हित धाता॥
श्वेत वर्ण, शुभ्र वसन, शुचि मंद हास्य मुख मण्डल
वीणा पुस्तक शोभित कर, अभय वरद सुख मण्डल॥
॥ जय जय जय सरस्वती माता ॥
राजहंस पर विराजित, पद कमल का श्रृंगार
मौक्तिक माला शोभित, मोती झलकार॥
॥ जय जय जय सरस्वती माता ॥
चन्द्र मुकुट शीश विराजे, कुण्डल झलकत कान
नासिका में मोती शोभे, करत बदन की शान॥
॥ जय जय जय सरस्वती माता ॥
बुद्धि दान दो माँ हमको, वर दो ज्ञान अपार
काली अक्षर रूप मिटा दो, करो भव से पार॥
॥ जय जय जय सरस्वती माता ॥
मन्द मन्द मुस्कान तुम्हारी, हरती भक्तों की पीर
पाप ताप त्रिविधि निवारण, हरती मन की भीर॥
॥ जय जय जय सरस्वती माता ॥
तुम बिन और न कोई माता, जग में दीन दयाल
जो फल चाहे वह पावे, हो जाए मालामाल॥
॥ जय जय जय सरस्वती माता ॥


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